मैं सूरज हूँ आग का गोला,
तुम चंद्रमा निर्मल शीतल,
मैं हवा बलवान अभिमानी,
तुम पृथ्वी निच्छल जग माता,
मैं बादल काला घनघोर,
तुम वर्षा मीठी हर ओर,
मैं आकाश नीला नभ अम्बर,
तुम धरती रेशम का चम्बल,
मैं पानी गहरा अंधेरा,
तुम धारा चंचल अंगारा,
मैं पर्वत सीधा स्थूल,
तुम गंगा हो प्रेम का सागर,
मैं पिता अमृत का साया,
तुम देवी महिमा का आँचल,
मैं मधुबन तुम मेरी कंचन,
मैं पुरुष तुम रूप प्रकृति,
स्त्री का हर स्वरुप हो धरती,
पूजा सैनी


