*1.इस शेर -ओ -शायरी की रूहानियत तो देखो,

शब्द बनकर जज़्बात पिघल जाते है,


*2.ज़िन्दगी जीने के लिए, दो पल ही काफ़ी है,

एक बचपन तो, एक मोहब्बत का,


*3.तारीफ़ें जाम की करें तो, मोहब्बत बुरा मान जाती है,

कुछ पल ग़ज़ल के जिए तो, ज़ख़्म बुरा मान जाती है,


*4.याद नहीं इक बात तुम्हारी, फिर भी अश्क़ बहते है,

शुबा करें जब भी तुम्हारी, दिल के दर्द तड़पते है,


*5.जीने की सदा क्या याद नहीं है,

नग़मों में कुछ बात वही है,

*पूजा सैनी