शब्दों में मैं नज़र हूँ आता,
हर लेख शुरू करता, ख़त्म करता,
बातो की सुरों की बोली,
हर एक चीज़ को लिख जाता,
नैनो की गोद में बैठकर,
मौसम की यादे बन जाता,
फिर, कोई डायरी पढ़,
मेरी ही ठाठ जमाता,
तारीफों का मैं मतवाला,
हर रंग में मिलता, किसी दुकान पर,
पानी में फिर में मिला जाता,
मन की बातें मुझसे बांटते,
हर इक दुख को कम कर जाता,
पहचानोगे तो जानोगे,
मेरा महत्व न किसी से कम,
रिकॉर्ड का में बादशाह,
पहचान लिया तो जान लिया,
हूँ, मैं एक - 'कलम',
पूजा सैनी


