पेड़ो की लहराती हवा,

कलियों की मुस्काती हंसी,

फलों की भी बात वही,

समझ ना पाओ, फिर तुम क्यों,


चिड़िया करती ची-ची-ची,

मोर वर्षा में नाचता,

फूलों की भी बात वही

समझ ना पाओ, फिर तुम क्यों,


ऋषि -मुनी भी यज्ञ करते है,

पंडित भी पूजा करते है,

परियों की भी बात वही,

समझ ना पाओ, फिर तुम क्यों,


पूजा सैनी