प्रकृति की ये बातें अनजानी,
पूछती है हमसे एक सवाल,
जाना है, क्या कभी तुमने मेरा राज़,
और, हम देते है एक जवाब,
सूरज की ये जो रोशनी है,
वो फूलों की जो खुशबू है,
किसी डिबिया में बंद वो ऐसी,
रंगों की प्यारी होली है,
पेड़ो की ये ठंडी हवाएं,
पक्षियों की मधुर वाणियाँ,
चांदनी की फैली चादर में,
मेरे सपनो की मीठी बोलिया है,
रेत की फ़िसलती टोलियां,
बादलो का बरसता पानी,
ओस की ठहरी बूंदो में,
दीपो से रोशन दिवाली है,
देवो की इस धरती में,
महात्माओं की इस अमृत ज्ञान में,
ठहरा इक ऐसा अनमोल सवाल है,
जिसका जवाब कहीं भी न था,
उसका जवाब है मन के अंदर,
ढूंढने पर जो मिलता है जवाब,
प्रकृति की ये बातें अनजानी,
पूजा सैनी


