
प्रकृति की ये बातें अनजानी,
पूछती है हमसे एक सवाल,
जाना है, क्या कभी तुमने मेरा राज़,
और, हम देते है एक जवाब,
सूरज की ये जो रोशनी है,
वो फूलों की जो खुशबू है,
किसी डिबिया में बंद वो ऐसी,
रंगों की प्यारी होली है,
पेड़ो की ये ठंडी हवाएं,
पक्षियों की मधुर वाणियाँ,
चांदनी की फैली चादर में,
मेरे सपनो की मीठी बोलिया है,
रेत की फ़िसलती
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