यह जो पेड़ की छाया है,
वह धूप की निर्मल काया है,
ढूंढोगे तो मिल जाएगा,
कहीं ऋतुओं का मेला,
कहीं प्यार भारी खुशियाँ सारी,
कहीं महकती सुबह की लाली,
प्रेम के रस में डूबी हरियाली,
सज्जनता की सौगात लिए,
फेरो की बारात लिए,
चलते रहना, ठहरना नहीं,
यही सन्देश देना है सबको,
कह देना थोड़ी -सी चाहत,
देशप्रेम की मन में भावना,
सूर्य के आगमन से आकाश,
जगमग करता सारा जग आज,
फूलों की रंगीन पंखुडिया,
पक्षियों की ऊँची ये उड़ान,
मछलियों की उत्साह देती फ़रमान,
सबका कहना एक हो जाओ,
कोई ना करे तुम्हारे खंड, अपना विस्तार,
अगर तुमने ये कर लिया विचार,
फिर ना हो, कोई अन्याय का गुलाम,
इन्साफ करो भेदभाव मिटाओं,
खुले आकाश में तिरंगा फहरेगा,
लोगो में विश्वास जागेगा,
जीत होगी हर बार न्याय की,
सबसे बड़ा धर्म मानो इंसानियत,
नीति को अपनाकर चलो,
ना बढेगा भ्रष्टाचार,
ना सहेगा कोई पीड़ा का भार,
जीवन ही है, सबसे सुन्दर,
ना करो तुम इसका बहिष्कार,
हर पल को आख़िरी समझो,
आख़िरी ग़लती मानो तुम कल को,
मन में कर लो इक विश्वास,
यही सन्देश देना है सबको,
यह जो पेड़ की छाया है,
वह धूप की निर्मल काया है,
पूजा सैनी


