आज़ाद है अब ये ज़मीं,
आज़ाद है ये आसमां,
कुर्बानियों से उन शहीदों की,
आज़ाद है अब ये जहां,
पाया अपना स्वाभिमान है,
किसी मुल्क का नहीं,
किसी व्यक्ति का नहीं,
अब ये ग़ुलाम -
भ्रष्टाचार, ज़ुर्म और बुराई का है,
पिछड़ापन अब भी है इसमें,
इसीलिए,
शिक्षित करना हर बाशिंदे को है,
पोलियो से मुक्ति मिली है,
अन्न के भंडार भरे पड़े है,
पर कुपोषण अब भी है इसमें,
लेक़िन ये वतन स्वाभिमानी है,
लोगो के सुधार की नींव,
अमूल्य विचारों ने डाली है,
देशभक्ति है इसकी परवरिश,
दोस्ताना अंदाज़ है, क्योंकि,
आज़ाद है अब ये ज़मीं
आज़ाद है ये आसमां,
मेहनतकशों की बाज़ुओ की बदौलत,
आज़ाद है अब ये जहां,
पूजा सैनी


