ये रूह से बंधे जो धागे हैकब तक यूँही उलझते रहेंगे,ओस की उस बूँद की तरहनजाने कब तक फिसलते रहेंगे ।
ये रूह से बंधे जो धागे है
कब तक यूँही उलझते रहेंगे,
ओस की उस बूँद की तरह
नजाने कब तक फिसलते रहेंगे ।