हुआ था एक बुद्धि–सम्राट,
कथा है जिसकी बहुत विराट;
कभी न भाया जिसे आराम,
उस कलाम को मेरा सलाम।
हिंद को किया परमाणु प्रदान,
वह था धारणी माँ का वरदान;
जिसने किए खोज तमाम,
उस कलाम को मेरा सलाम।
जो ‘मिसाइल मैन’ कहलाया,
शास्त्र जगत में इतिहास बनाया;
जिसको प्यारी सारी आवाम,
उस कलाम को मेरा सलाम।
जिससे प्रेरित बूढ़े-जवान,
उर से करूँ उसका गुणगान;
चित्त के जिसके कोई न दाम,
उस कलाम को मेरा सलाम।
धन्य हुई माँ उसको पाकर,
कितनी होगी वह जननी महान?
जन्मा न फिर ऐसा मानव आम,
अब्दुल कलाम को मेरा सलाम।