हम कब के तुम्हारे हो जाते सनम,
अगर ज़िंदगी में कोई दस्तूर न होता !!
दिल तक दस्तक जरूर दे पाते,
अगर तेरे दिल का पता इतना दूर न होता !!
कोई हमें बावला न कहता,
अगर हम पर तेरे इश्क़ का सुरूर न होता !!
हम इस मोहब्बत-ए-कैद से कब के रिहा हो जाते,
अगर तुझसे दिल लगाने का कसूर न होता !!