मीरा, सूर, के मधुरिम पदों की तान है हिंदी। कभी तुलसी के मानस का बनी सम्मान ये हिंदी। हरिश्चंद जी के छंद में यौवन मिला इसको , कृष्ण की भक्ति में डूबा हुआ रसखान है हिंदी।