ये जो तुम्हारी मुस्कुराहट है किसी से मिलती है,

जो मेरा सब कुछ थी, उसी से मिलती है,

मिल जाए कहीं तो मेरा एक पैगाम देना,

जाना, ना जाने कैसे ये ज़िन्दगी कटती है,

क्या अभी भी वो नूर है उसके चेहरे पर?

क्या अभी भी मुस्कुराहटों पर कलियां खिलती है?

क्या घटाएं अभी भी जुल्फों में लिए चलती है?

क्या अभी भी हल्का सा काजल फेला है?

क्या अभी भी सूरज की पहली किरण सा चेहरा है?

क्या अभी भी सबके खेरियत की बात करती है?

क्या मुझे अभी भी याद करती है?