दीप की माला सजाएँ,

गान मंगल गुनगुनाएँ ।

रीत त्रेता की वही हम,

आज कलि में फिर निभाएँ ।।


इस कदर बाँटों खुशी कि जग सभी गम भूल जाए ।

अब रौशनी कुछ यूँ करो कि रास्ता तम भूल जाए ।।


आओ करदे कुछ दीवाली,

सैनिकों को हम समर्पित ।

राष्ट्रहित जो सरहदों पर,

कर गए प्राणों को अर्पित ।।


सिंदूर जिन माँगों का उजड़ा कर्ज़ न उनका भुलाएँ ।

अब रौशनी कुछ यूँ करो कि रास्ता तम भूल जाए ।।


प्यार को दे प्यार हम,

मनुहार को मनुहार बाँटे ।

हिन्द के हर शत्रु का,

शमशीर से हम शीश काँटे ।।


बुद्ध से बुद्ध युद्ध से हम युद्ध का रिश्ता निभाएँ ।

अब रौशनी कुछ यूँ करो कि रास्ता तम भूल जाए ।।


हम रहे खुद्दार बनकर,

जिंदगी हो स्वाभिमानी ।

रक्त के कण-कण में शामिल,

हो सदा तेवर तूफ़ानी ।।

युद्धभूमि में सदा दुश्मन को हम पानी पिलाएँ ।

अब रौशनी कुछ यूँ करो कि रास्ता तम भूल जाए ।।