अपनी ज़ुल्फों में हाथ फिराती वह लड़की ।

मादक इक ख़ुशबू बिखराती वह लड़की ।।


हाँ,महफ़ूज़ है अब तक मेरी यादों में ।

दर्शन रावल का गाना गाती वह लड़की ।।


ज़ुदा हुए मुद्दत बिता, पर जाने क्यों ?

अब भी मुझको है तड़पाती वह लड़की ।।


याद में उसकी तारे गिनता हूँ शब भर ।

अब तक है रतजग़े कराती वह लड़की ।।


क़शमक़श है, मैं डर से रो भी न पाता हूँ ।

आँखों से निकले न मुस्काती वह लड़की ।।


क़ाश कि मेरी हालत उसे समझ आती ।

बाँहों में भर, मुझे इश्क़ सिखाती वह लड़की ।।


छोड़ो ये सब, इतना बस मुझको क़ाफ़ी था ।

अपने हाथों से ज़हऱ पिलाती वह लड़की ।।