जाड़े की शाम में गरमी जैसा,
और माँ की ममता के नर्मी जैसा,
पापा के ज़ोरदार ठहाकों जैसा,
और सुबह की चाय के प्यालों जैसा,
खेतों की हरियाली जैसा
और दादी की मीठी गाली जैसा,
नन्ही चिड़ियां की उड़ान जैसा,
और बच्चे की मुस्कान जैसा,
मस्त पवन के झोखों जैसा,
और दिवाली के नए तोफों जैसा,
कॉलेज के जिगरी यारों जैसा,
और चांदनी रात के तारों जैसा,
किशोर कुमार के नगमों जैसा,
और पहली तनख्वाह के रकमों जैसा,
मीराबाई की भक्ति जैसा,
और कुदरत की शक्ति जैसा,
पहली बारिश की फुहार जैसा,
और नए मौसम की बहार जैसा,
सुबह जैसा,
शाम जैसा,
इस धरती और आसमान जैसा,
तेरा प्यार है इस पूरे संसार जैसा!


