Poetry 1 min read 787.8K reads

seekh


उम्र बढे तो घट जाओ तुमचंदा सा बस आधा होकरअँधेरे को मिटा ही दोगे तुमसुबह की उजली किरण बनकर

हर हार -जीत के बीच मेंउम्मीद की रेखा रहती हैतुम उस लकीर पर बने रहोजीवन की राह यही कहती है

Read more Earn more Learn more