मुझे यकजा करने की बहुत कोशिश की मगर
मैं बिखरा हूँ कि बिखरा ही रह जाऊँगा।
मेरे हिस्से की ख़ुशी को मैंने उसके नाम किया
मेरा क्या है, मैं तो यूँ ही बसर कर जाऊँगा।
मेरे ख़्वाब-ए-सहर में उसका ज़िक्र न होता है अब
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मुझे यकजा करने की बहुत कोशिश की मगर
मैं बिखरा हूँ कि बिखरा ही रह जाऊँगा।
मेरे हिस्से की ख़ुशी को मैंने उसके नाम किया
मेरा क्या है, मैं तो यूँ ही बसर कर जाऊँगा।
मेरे ख़्वाब-ए-सहर में उसका ज़िक्र न होता है अब