कैसे चुकता होगा ये कर,
प्यार का मुझ पर जो बक़ाया हुआ है ।
मुझ नासमझ नादान का रिश्ता,
दोनों हाथों से तुमने जो अपनाया हुआ है ।।
बेकार ही लोग कहते हैं इस जग में,
प्यार की गुणवत्ता का ह्रास हुआ है ।
मग़र निवेश करोगे तो दुगना मिलेगा,
मैंने तो रिश्ते में यही पाया है ।।


