किसको क़ातिल ठहराया जाए
किसका नाम पुकारा जाए

आतंकवाद, आतंकवादी का मजहब नहीं होता
जरा समझाओ यह कैसे बतलाया जाए

बचपन में सीखा था ईश्वर रब खुदा एक
अब क्या सबको अपना अलग बताया जाए

आखिर कब तलक लाशों से भू सजेगी
कब तलक अश्रु भांति अपनो को व्यर्थ गंवाया जाए

कलम तो बस पूछती इतना
अमन मिले जिससे वो कौन सा नाम सिखाया जाए

—पीयूष