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ऐसा नहीं है कि जिंदगी में कोई खास कमी है,
फिर भी न जाने क्यों नींद से दुश्मनी है।
फिर से याद आए हैं वो पुराने दिन,
फिर से तैरने लगी आँखो में नमी है।
कुछ तो हो सुकून मयस्सर हमको भी
एक अर्से से मेरे हिस्से में सिर्फ बरहमी है।
 

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