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तुम दुल्हन बन गई

हाथों की कलाई हथफूलो से सज गई

झुमको से श्रुतिपट की शोभा बढ़ गई

हार सुशोभित करता ग्रीवा को

माँग टिका बढ़ाता मस्तक की गरिमा को

सर पे पल्लू लिए नैनो में हया किए

आंगन को अपने जगमग कर गई

देखो तुम दुल्हन बन गई।

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