चलो तुम्हे फिर दिल की तह तक ले चले

साथ कुछ मशालें कुछ बेलचे भी ले चले


तुम तो वाकिफ़ हो इन राहो से फिर हैरानी क्यूँ

आओ फिर भी हाथ थामें तुम्हे ले चले


अंजान थे जिन कूंचों से अब तलक हम

तेरे निशाँ-ए-पा देख खुद को वहीं ले चले


यूँ तो हमने किनारा कर लिया उन गलियों से मगर

मिलते है शाम से जब तो वो फिर वहीं ले चले।


बेजान खिलौनों की तरह कब तक खेलेगी तक़दीर 

ज़िंदा अश्कों को देख कभी तो साथ ले चले।


होंसला, उम्मीद, ख्वाबों की चमक बरकरार है

मेरी बेटी उंगली पकड़ मुझे बाज़ार जो है ले चले।