ये साए तुम्हारे नही रोशनी के साथ चलते है
अजब लोग है गलतफहमियों को साथ चलते है।
इ'ताब, अफसोस, शिकवा तुम तक कहाँ पहुंचा सकते है
तेरे इन्ही तोहफों को लिए सफर पे चलते है।
क्या गज़ब दिन है दिल-ओ-दिमाग एक साथ छीन लिए गए है
अब बस अपनी रूह को साथ लिए चलते है।
इस मोड़ से तुम कहीं और में कहीं बढ़ चले है
मगर तू जाने है जिसे उसे यहीं छोड़ चलते है।


