छूकर स्मृतियों को जब
अंतर्मन को झकझोरता है
सुनें सस्मित चितवन में
दीप प्रज्वलित कर जाता है
ख़ामोश लफ्जों में व्याकुल सा
मूक वेदनाएं नेह बन दुलारता है
लिखती पाती सजल नेत्रों से
श्वासों में आशा का अंकुर उग जाता है
पीक गाती सुरम्य साज करूण कंठ से
ह्रदयतंत्रियों में कसकन कोई जगाता है
शिथिल चरणों की थकित चाल से
रूनझून नूपुर का कातर क्रन्दन सुनाता है।
@pinkrose0113
पिंकी ✍️


