
छूकर स्मृतियों को जब
अंतर्मन को झकझोरता है
सुनें सस्मित चितवन में
दीप प्रज्वलित कर जाता है
ख़ामोश लफ्जों में व्याकुल सा
मूक वेदनाएं नेह बन दुलारता है
लिखती पाती सजल नेत्रों से
श्वासों में आशा का अंकु
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छूकर स्मृतियों को जब
अंतर्मन को झकझोरता है
सुनें सस्मित चितवन में
दीप प्रज्वलित कर जाता है
ख़ामोश लफ्जों में व्याकुल सा
मूक वेदनाएं नेह बन दुलारता है
लिखती पाती सजल नेत्रों से
श्वासों में आशा का अंकु