संस्कार



एक विचार मन में आता है

कि हमारे संस्कारों की सीमा

क्या रह गई...?


क्या इतने आधुनिक हो गए हम

कि प्रणाम और नमस्कार की जगह

बच्चों को हाय अंकल, हेलो ताऊ जी...

बोलना पड़े ,


चरणों तक तो बच्चे

झुकना ही नहीं चाहते ..?


बस घुटनों के हाथ लगाया

हो गए बड़ों के चरण स्पर्श


आधुनिक होना गलत नहीं है

लेकिन संस्कार भूल जाना गलत है...


अगर संस्कार खो गए तो

बहुत मुश्किल हो जाएगा

बच्चों में सम्मान की भावना जगाना..?


समय के साथ बदलाव जरूरी है

पर हमारी परमपराएं और आधुनिकता

इन दोनों का सामंजस्य करके...




@pinkrose0113