कितने दिनों बाद आज सबके चेहरे पर खुशी थी

आखिर पॉजिटिव से रिपोर्ट जो नेगेटिव आई थी


इन दिनों जीना क्या था घुट घुट कर मरना था

अकेले तन्हाइयों में जीना भी कोई जीना था


कट रहे थे दिन अंगुलियों पर गिन-गिन कर

तसल्ली दे रहा था खुद को सब ठीक होगा सोचकर


क्वॉरेंटाइन खत्म कर मां की कोठरी में गया

अकेले रहने का दर्द मैं अच्छी तरह समझ गया


कोठरी को ताला लगाकर मां को अपने पास बिठाया

भरकर आंखें मां ने हाथ अपना मेरे सर पर रखा


कोरोना की पॉजिटिव रिपोर्ट बहुत कुछ सिखा गई

मां के बिना सूने आंगन को फिर से चहका गई।



                             पिंकी ✍️

@pinkrose0113