रंग बदलती है दुनिया

कौन यहां दुध का धुला है

सही नहीं होता खुद का किरदार

दूसरों में नुक्स निकालने चला है


मतलबी हो गए हैं रिश्ते सारे

छल कपट दिल में भरा है

झूठ मक्कारी का फैला साम्राज्य

किसको ढूंढे जो सोने सा खरा हैं


मेरे तेरे में मां बाप को ही बांट लिया

धन दौलत का तो हिसाब ही न्यारा है

अजनबी बनकर रह गया पड़ौसी

हर रिश्ता क्यो बन रहा खारा है..!!


पिंकी ✍️ @pinkrose0113