सुनो पिया

कुछ लिखुं ऐसा

जो छूए तुमको

तुम्हारे अंतर्मन को

कोई शरारत नई

या फिर हसरत कोई

तु बस देखे और

समझ जाएं मेरी बात

प्रेम की पाती

नही आती लिखनी

जो जैसा रूचता है

लिख देती हूं बस 

इतना कहना है

मेरी इबादत

मोहब्बत, चाहत

मेरे नगमे, मेरी गजल

तुम से शुरू और

तुम पर ही खत्म है।