
पिता का प्यार
जैसे ही बस रूकी छन की आवाज आई
इधर उधर देखा पर ऐसा कुछ नजर नहीं आया
पर वो पायलों की आवाज जैसे
बस के हार्न के साथ
अपनी ताल से ताल मिला रहीं थीं
बस कुछ खाली हूई तो आगे वाली सीट पर बैठी
फिर वही आवाज
अब तो सब्र नहीं हो रहा था
केबिन में झांक कर देखा
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