जो अपनी चहचहाहट से
मेरे घर आंगन को
चहकाए रखती थी
जिसकी बोली से
मेरी सुबह होती थी
शाम ढले जो छूपती थी
मेरे आंचल मे दुबककर
कभी बिन बात
ही रूठ जाती
तो कभी बात बे बात
खिलखिला जाती
वो नन्ही सी चिड़िया
मेरी जिंदगी को
जैसे मुकम्मल
कर रही थी
और फिर एक दिन
वो उड़ गई,
मुझे अधूरा छोड़..??
@pinkrose0113


