खुद तपकर दूसरो
को छांव देती
चाहत का दरिया बहाती
न किसी से शिकवे
न शिकायत
अपना कर्म मान वो
दिन रात खटती
अपनो की तरफ देखती
इस उम्मीद से
थक गई आराम कर लो
सुनने को तरसती
कभी अपनी खुशियो के
लिए नही जीती
बस देना सीखा है पर
अपने लिए कुछ नही मांगती
नारी है इंसान ये बात
वो किसको समझाती।
@pinkrose0113


