ख्यालों के पिंजरे से
बाहर निकल कर
किसी एकान्त में
बैठ प्रकृति की गोद
में तुम्हे घंटों पढ़ती हूं
फिर सोचती हूं
लिख दूं कोई शायरी
या गजल या फिर कहानी
जो उतर जाए तेरी रूह मे
और समा जाऊं तेरी सांसों मे
मिलकर मेरा वजूद तुझ में
एकाकार हो जाए
जैसे मिल गई हो
नदी सागर मे..।
@pinkrose0113
