तुम सा बन जाऊं मैं कुछ ऐसे ढंग में

प्रतिरूप बन जाऊं तेरा रंग कर तेरे रंग,


पेशानी पर आने न दू कभी इज्तिराब की लकीरें

तबस्सुम बनूं तेरे लबों की खिल जाऊं बनकर तरंग,


लगा दूं टीका छवि ऐसी बने लगें न चश्म_ए_बूर

तराना खुशियों का गुनगुनाए जीवन‌ न हो कभी बेरंग..!!


#बज़्म 

पिंकी ✍️


@pinkrose0113