कितना प्यारा है मां

तेरा वो अंगना..


जहां खेलते कुदते गिरते संभलते

फिर आकर तुझसे चिपकना..


पढ़कर जब आती थी मैं घर

अपने हाथों से वो दही रोटी खिलाना..


जब दिनभर खेलकर थक जाती थी

रात को थपकियां देकर अपने आंचल में सुलाना..


देखती जब मेरी अधखुली आंखें तो

मुस्कुरा कर फिर परियों की कहानी सुनाना


.......


छलक आए सबकी आंखों में आसूं

जब डोली में बिठाकर किया मुझे रवाना..


कुछ ने सुखी रह का आशीर्वाद दिया

तो कुछ ने दुआओं का दिया खजाना..


मां मेरी गुमसुम सी खड़ी एक कोने में

कितना दर्द था आंखों में नहीं चाहती थी जताना..


भूलाकर अपनी तकलीफ को

बेटी खुश रहें सुखी रहें करती बस यही प्रार्थना..


पर मां..

याद आता है तेरा वो अंगना..


पिंकी✍️

@pinkrose0113