खेल बहुत खेलते थे बचपन में


पर लुकाछिपी की बात ही अलग थी


जब ढूंढने की बारी आती किसी दोस्त की


तो मानो उसके लिए यह एक बहुत कठिन पजल थी


कभी छत की मुंडेर के पीछे


तो कभी चारपाई के नीचे

बचपन की और हमारी जिंदगी की


यही सबसे खूबसूरत गजल थी।



@pinkrose0113