
खेत की मुंडेर पर बैठा दम्पत्ति
देख रहा अपनी पसीने से कमाई सम्पति
बेबस आंखें करती है हाल बयां उनका
घर चलाने के लिए चुगना पड़ता है मोती
दोनो मिलकर खींचते गृहस्थी की गाड़ी
फिर कहां होती जरूरतों की पूर्ति
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देख रहा अपनी पसीने से कमाई सम्पति
बेबस आंखें करती है हाल बयां उनका
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दोनो मिलकर खींचते गृहस्थी की गाड़ी
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