अपनी मेहनत की कमाई के लिए

सड़कों पर हमें उतार दिए

बदनसीबी देखो हमारी खुद के

अन्न के लिए हम कितने लाचार हुए


बंगला गाड़ी नौकर चाकर का

ख्वाब कहां देखा था हमने

सुख की रोटी मिल जाए दो जून की

इसी सपने को पुरा किए


बच्चे की तरह देखभाल करते

ना दिन ना रात देखते

अपनी खून पसीने की कमाई के लिए

फिर भी देखा इनको तरसते हुए


ना सुनता है ना दिखता है

दर्द इनका बेरहम सरकार को

सुकून से सोते हैं देश के चौकीदार

कैसे वो इतने बेरहम हुए


सबका पेट भरने वाला

न्याय के लिए तरस रहा

ये मेरे देश का किसान है

देखा नहीं कभी घुटने टेकते हुए


जिद है अहिंसा से हक पाएंगे 

बंजर को भी उर्वर बनाएंगे

पाकर अपना वाजिब हक 

फिर इस चमन का कण कण महकाएंगे।


पिंकी ✍️

@pinkrose0113