कौन खुशहाल है


मेरे देश का हाल बेहाल हैं

यहां हर कोई चलता पल पल नई चाल है

जो गरीब है उसकी गिनती तो करें ही कौन

पैसे वाला भी खुद को कहता कंगाल है।


छोटे से काम के लिए चक्कर हजार लगते हैं

जब तक जेब न भरो काम कहां करते हैं

गिर जाते हैं इस हद तक दो चार पैसों के लिए

जहां दिखे राई जितना भी फायदा

नाक रगड़ने में भी कहां शरमाते हैं।


जिसके पास थाली है उसके पास दाना नहीं

जिसके पास दाना है उसको किसी से लेना देना नहीं

दम दिखाता है सिस्टम भुखे, नंगे लोगों पर

देश लूटने वालों से भाईचारा तोड़ना नहीं।


जिनकी चलती नही घर पर वो देश चलाते हैं

कूपमण्डूक बन नाजायज मुद्दों पर उछल कूद मचाते हैं

नौजवान यहां के झूठे वादों की मीठी गोली खाकर

बैठ चबूतरे पर विकास के नाम डिगें खुब हांकते है।


पिंकी ✍️

@pinkrose0113