कभी मन करे तो

रूठ जाना तुम

मैं मना लूंगी....


बिगड़ भी गए रिश्ते

तो क्या अपने

स्नेह से फिर बना लूंगी..


नोंक-झोंक की इस

बगिया में

खुशियों के फूल मैं खिला लूंगी..


कभी मन करे तो .....


कहीं जाने का मन हो

तो चले जाना

संग संग मैं भी चल लूंगी..


दर्द कभी हो तो

रो लेना ना

तेरे संग मैं भी रो लूंगी..


कभी मन करे तो ....


कभी गुस्सा आए तो

निकाल लेना मुझ पर

तेरा गुस्सा भी मैं सह लूंगी..


कभी बरस जाना तुम

प्रेम सुधा बनकर

तेरे संग मैं भीग लूंगी..


कभी मन करें तो .....


पिंकी ✍️