कब चाहता था वो कि घर बिक जाएं

किसान है तो क्या जमीर बिक जाएं


खुन पसीने से सींचता था जिसको

कर्ज उतारने के लिए क्या

वो जमीं बिक जाएं


अन्नदाता कहलाता सबका पेट पालता

खुद का पेट भरने के लिए क्या

दूसरों पर मोहताज हो जाएं


मेहनती है ईमानदार हैं पाई पाई जोड़ता है

बच्चों को सुख सुविधाएं देने फिर क्या

वो इतना बेबस हो जाएं


नहीं देते हम वो मान सम्मान जो हक है उसका

पाने के लिए इज्जत अपनी क्या

वो किसी के कदमों में गिर जाएं


इज्जत से जिया है सम्मान से मरेगा मेरे देश का किसान

ना हाथ फैलाएं है ना हाथ फैलाएगा कभी ये नौजवान।


पिंकी ✍️

@pinkrose0113