
कब चाहता था वो कि घर बिक जाएं
किसान है तो क्या जमीर बिक जाएं
खुन पसीने से सींचता था जिसको
कर्ज उतारने के लिए क्या
वो जमीं बिक जाएं
अन्नदाता कहलाता सबका पेट पालता
खुद का पेट भरने के लिए क्या
दूसरों पर मोहताज हो जाएं
मेहनती है ईमानदार हैं पाई पाई जोड़ता है
बच्चों को सुख सुविधाएं दे
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