घुटता है दम यहां फैला है हवाओं में ज़हर
देखता है हर कोई यहां गिद्ध नजर से हर पहर
रहते हैं सब मूकदर्शक होती है जब छेड़छाड़
एक पल में कितनी लड़कियां बनती रेप का शिकार
ये तो आम बात है कहकर टाल देते हैं सब यहां
घृणित मानसिकता से है यहां हर कोई बीमार
अपनी अपनी रोटियां सेंकने पर लगी है सियासत
नोच डालो, काट डालो मत सुनो उसकी कातर चित्कार
अहसास होगा तब तुमको जब खुद की बेटी रोंदी जाएगी
तड़पोगे कितना देखकर बच्ची को मच जाएगा हाहाकार
कुचल डालो जालिमों को बेटी अभी भी उम्मीद लगाए हैं
टूट पड़ो बनकर फौलाद खत्म करो अब ये अत्याचार
मत करो नजरंदाज कोई तो वजूद उसका भी होगा
बेटी को बेटी बनकर जीने दो मत छीनो उसका ये अधिकार
पिंकी ✍️
@pinkrose0113
