जब पहला शब्द मैंने मां बोला

अपने निज भाषा में ही मुंह खोला

सभ्यता, संस्कार से परिपूर्ण है

हर शब्द इसका दिल से निकला,


अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है

इसलिए सब धर्मों ने इसको अपनाया

कबीर, तुलसी, मीरां, केशव या हो रहीम

सबने हिंदी भाषा में ही ज्ञान का पथ दिखाया,


करते हैं निज वंदन, गौरव व अभिमान

दिलाती है हमको ये भाषा मान और सम्मान

विश्व में सबसे ज्यादा बोली जाती

फिर भी मिलता कदम कदम पर अपमान,


हिंदी हमारी मातृभाषा है, गुरूर है

फिर भी करते हैं हम मोह अंग्रेजी का

धिक्कारती नहीं अंतरात्मा हमारी

बनते क्यों नहीं हम उपासक देशी का,


हिंदी भाषा बने सबल यह संकल्प हमें लेना है

अपना कर इसको मजबूत खुद को बनाना है

स्वदेशी, सद्भावना, सोहार्द इन सबके लगाव से

राष्ट्रभाषा का सम्मान इसको दिलाना है।



पिंकी ✍️

@pinkrose0113