नोंचा था वहशी भेड़ियों ने जानवर की तरह

हैरत में हूं कि अभी भी जिंदगी से लड़ रही है वो


बंद आंखों में शोले‌ बरस रहे आंसुओ के रूप में

हैरत में हूं अंदर की ज्वाला को कैसे रोक रही है वो


बिक रहे हैं रिश्ते दिखावे‌ की वाहवाही में

हैरत में हूं कैसे तिल तिल कर मर रही हैं वो


कैसे घावो पर नमक छिड़का जा रहा है

हैरत में हूं दर्द को कैसे बंद होठों से पी रही है वो


नफरत यातनाओं के हिमपात में जम गई है

हैरत में हूं अभी तक राख में बदली नहीं है वो


जज्बा है उन भेड़ियों को मौत के घाट उतारने का

देखने को मौत उनकी इसीलिए जी रही है वो


लडूंगी आखरी सांस तक लहू की एक बूंद तक

टूटे हौसलों को अपने एक एक कर जोड़ रही है वो



@pinkrose0113


 पिंकी ✍️