जहां बोलना होता है

वहां खामोश हो जाते हैं

जहां खामोश रहना है

वहां वाक युद्ध हो जाते हैं

खुद का बच्चा करे गलती

तो होंठ सिल जाते हैं

दूसरों के बच्चों में दुनियाभर की

कमीयां निकाल देते हैं

सोशल साइट पर

परिवार बसा लेते हैं

घर के रिश्तो को

उपेक्षित करते हैं

बाहर औरत की शिक्षा व आजादी

पर बड़े-बड़े भाषण देते हो

और घर आकर अपनी ही

पत्नी को व बेटी को सताते हो

जरूरतमंद को एक ₹

भी नहीं दे पाते हैं

और मंदिरों में लाखों का

दान कर आते हैं

घर में राम बनते है

बाहर रावण बन जाते हैं

हे इंसान ये दोहरा चरित्र

कैसे जी पाते हो....



@pinkrose0113