
सिर्फ हवा ही नहीं बदली जमाने की
मुखोटे पर मुखोटा चढा देखा है हमने
सिमट गया दया,धर्म किताबों तक ही
सरेराह इंसानियत को बिकते देखा है हमने
बड़े बुजुर्गो का सम्मान, मर्यादा, संस्कार
अनपढ़,गंवार कहलाने वाले लोगों में देखा है हमने
भाग रहा है यहां हर इंसा मशीन की तरह
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