
चन्द्रमा की चंचल किरणें
स्वर्ण सी जब गिरे धरा पर..
संकुचित सी बैठी हो कोई
ओढ़े दुल्हन सुनहरी चुनर फैलाकर..
छैल
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चन्द्रमा की चंचल किरणें
स्वर्ण सी जब गिरे धरा पर..
संकुचित सी बैठी हो कोई
ओढ़े दुल्हन सुनहरी चुनर फैलाकर..
छैल