गरीब पिता ने पढ़ा लिखाकर

शिक्षित मुझे बनाया

करूं कोई सरकारी नौकरी

ऐसा एक ख्वाब सजाया,


नौकरी पाने की चाहत ने

घर आंगन मेरा छुड़ाया

दर दर भटक रहा हूं मैं

जो कुछ पास था वो भी गंवाया,


रोज घर से फोन आता मां बापू का

बेटा आज कोई रिजल्ट आया

नौकरी ही बनाती है हैसियत

इसी से मिलती समाज में इज्जत

कहते कहते बापु का गला भर आया,


कैसे उनको समझाऊं अब

उनकी मासुमियत पर रोना आया

बेरोजगारी की समस्यां सिर्फ मेरी ही नहीं

ये काला बादल तो हर नौजवान पर मंडराया,


तमाम डिग्रियां नौकरी की मोहताज हो गई

नौकरी ही आज हर व्यक्ति के सर का ताज हो गई,


पढ़ा लिखा नौजवान ठोकरें खाता फिरता है

कैसी शिक्षा है ये जो आज का युवा पाता है।


पिंकी ✍️

@pinkrose0113