बागबां


समेटकर जीवन की ख्वाहिशें बनाता एक उपवन

देता रूप परिवार का कहलाता वो बागबान


सींचता सहेजता पत्ता पत्ता प्रेम की बौछारों से

कली को फूल बनाने किए होंगे कितने जतन


करता है हिफाजत स्नेह ममता की छांव में

महकता रहें खिलता रहें उसका ये आंगन


देखकर अपने बाग को खिल जाता होगा वो

मेहनत उसकी रंग लाई संवर गया उजड़ा चमन


उसके जीवन‌ का संगीत है जो मन में बसता है

पालक बन संवारता रहता जुटाता हरेक संसाधन


त्याग देता अपने सुख साधन ताकि उपवन खिलता रहें

बागबान का बाग से जुड़ा है ऐसा ही कुछ अमिट बंधन


पिंकी ✍️

@pinkrose0113