छुपा रही है होलै से

कुछ राज ये आंखें


भरा है दर्द पीड़ा अपार

दैन्य दुःख का नीरव हाहाकार

खून के आंसू बहाती ये आंखें


कभी डर का कभी नैराश्य का

कभी जीवन के सुनेपन का

देती है विज्ञापन ये आंखें


कभी अभिमान से भर जाती है

तो कभी पशुता से डर जाती है

निर्मम मानवता की दर्शक है ये आंखें


कभी बरस जाती है कभी हंस जाती है

मर मर कर भी जिंदगी को तरस जाती है

जर्जर जीवन का चित्र दिखाती है ये आंखें


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