रोशनी से निकलकर

अंधेरो मे गुम हो गया


थोड़ी सी तो ख्वाहिशे थी

उनका भी खून हो गया


हाड़ मांस का शरीर था

चलता फिरता सुन्न हो गया


भुख मिटाने की तलब मे

रोटी चुराने का जुर्म हो गया


मेहनत करने के बावजूद भी

गिड़गिड़ाना उसका कर्म हो गया


काम धंधा मिला नही कोई

भीख मागना उसका धर्म हो गया


पिंकी ✍️